कविता सीढ़ियों नहीं, छलाँगों की राह है

कविता अगर यह व्रत ले ले कि वह केवल शुद्ध होकर जिएगी, तो उस व्रत का प्रभाव कविता के अर्थ पर भी पड़ेगा, कवि की सामाजिक स्थिति पर भी पड़ेगा, साहित्य के प्रयोजन पर भी पड़ेगा।

क्या आपने कोई ऐसा इंसान देखा है?

कोरोना के क़हर के कारण कुछ अरसे से फ़ेसबुक पर वैसी पोस्टें देखने को नहीं मिल रहीं जो कुछ महीनों पहले रोज़ ही मिल जाती थीं। लगातार एक ही गुहार कि मेरे नाम से अगर कोई व्यक्ति पैसे माँगे तो उसे न दें, वह कोई फ़ेक अकाउंट होगा! जब भी ऐसे पोस्ट देखता, मन कचोट कर रह जाता… पता नहीं कौन होगा?

‘तकलीफ़ में गाने से ही सिद्धि मिलती है’

उत्तर प्रदेश में एक जगह है बनारस, जिसके इंचार्ज हैं—भगवान शंकर। यहाँ बनारस में भूत भावन भगवान भोलेनाथ ने अपना एक एग्जीक्यूटिव या कहें एक एजेंट छोड़ रखा है, नाम है—पंडित छन्नूलाल मिश्र।

लहू में आग और खाल में राग

सुबह-सवेरे मेरी आँख खुली तो सामने ग़ज़ब दृश्य था। बकरियों के बीच ज़मीन पर रामा लेटा पड़ा सो रहा था और बकरियाँ मिमियाते हुए उसका मुँह चाट रही थीं। रात को हम शराब पीकर नशे में ढेर हो गए थे। रात को कुछ खाया न था, इसलिए सुबह-सुबह बहुत ज़ोरों की भूख लगी थी। परंतु चूल्हे पर चढ़ाया गया खारी-भात का पतीला ग़ायब था।

हमारा युग एक विराट प्रतीक्षा का युग है

साहित्य के मर्म को समझने का अर्थ है—वास्तव में मानव-जीवन के सत्य को समझना। साहित्य अपने व्यापक अर्थ में मानव-जीवन की गंभीर व्याख्या है।

कभी-कभी निकम्मी आदतों से भी आराम मिलता है

छोटे स्वार्थ निश्चय ही मनुष्य को भिन्न-भिन्न दलों में टुकड़े-टुकड़े कर रहे हैं, परंतु यदि मनुष्य चाहे तो ऐसा महासेतु निर्माण कर सकता है, जिससे समस्त विच्छिन्नता का अंतराल भर जाए।

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