कविता सीढ़ियों नहीं, छलाँगों की राह है

कविता अगर यह व्रत ले ले कि वह केवल शुद्ध होकर जिएगी, तो उस व्रत का प्रभाव कविता के अर्थ पर भी पड़ेगा, कवि की सामाजिक स्थिति पर भी पड़ेगा, साहित्य के प्रयोजन पर भी पड़ेगा।

बूढ़ा गिद्ध क्यों पंख फैलाए-2

टी. एस. एलिएट की एक कविता-पंक्ति है : ‘बूढ़ा गिद्ध क्यों पंख फैलाए?’ इस पंक्ति को शीर्षक बनाकर समादृत कवि-आलोचक और कला-प्रशासक अशोक वाजपेयी साल 1967 में एक आलेख लिख चुके हैं। इस आलेख के केंद्र में अज्ञेय और सुमित्रानंदन पंत का तत्कालीन काव्य-व्यवहार था।

‘क़र्ज़ किस-किस नज़र के हम पर हैं’

सुधांशु फ़िरदौस से हरि कार्की की बातचीत

सुधांशु फ़िरदौस (जन्म : 1985) का वास्ता इस सदी में सामने आई हिंदी कविता की नई पीढ़ी से है। गत वर्ष उनकी कविताओं की पहली किताब ‘अधूरे स्वाँगों के दरमियान’ शीर्षक से प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक पर एक आलेख ‘हिन्दवी ब्लॉग’ पर प्रकाशित हो चुका है। इसके साथ ही सुधांशु फ़िरदौस इसक-2021 के कवि भी हैं।

इक्कीस के इक्कीस कवि

हिन्दवी ने इसक को अपनी मुख्य योजना में सम्मिलित किया है। यह हमारा वार्षिक आयोजन होने जा रहा है। इसकी शुरुआत इसक-2021 से हो रही है।

नए साल के नए संकल्प

पिछले वर्ष नव वर्ष की पूर्वसंध्या पर पता नहीं किस मनःस्थिति में मैंने याद किया सुजान सौन्टैग को और कह दिया उनके हवाले से कि इस वर्ष संकल्प नहीं, प्रार्थनाएँ—करुणा, कृपा, नवाज़िश।

उनकी नज़र और उनकी कहन इस मंज़र में लासानी थी

इस मनहूस साल के आख़िरी सप्ताह में एक और मनहूस ख़बर—शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी (1935–2020) नहीं रहे। उनके भतीजे, दास्तानगो और फ़िल्म निर्देशक महमूद फ़ारूक़ी ने यह सूचना ट्विटर पर दी।

ट्विटर फ़ीड

फ़ेसबुक फ़ीड