इस वर्ष के इक्कीस कवि

वर्ष 2021 में हमने हिन्दवी पर इसक के अंतर्गत ऐसे 21 कवियों की कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिन्होंने गए इक्कीस वर्षों में हिंदी कविता संसार में अपनी अस्मिता और उपस्थिति को पाया और पुख़्ता किया। इसक—यानी इक्कीसवीं सदी की कविता का संक्षिप्त रूप—की परिकल्पना को प्रकट और स्पष्ट करते हुए गत वर्ष हमने कहा था कि इसक हमारी मुख्य योजनाओं में सम्मिलित है और यह हमारा वार्षिक आयोजन होने जा रहा है। इस प्रसंग में ही अब प्रस्तुत है—इसक-2022

इसक की इस दूसरी कड़ी में हम 21 ऐसे कवियों की कविताएँ प्रस्तुत कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश ने इस यानी इक्कीसवीं सदी के लगभग दूसरे दशक में हिंदी कविता के संसार में प्रवेश किया और अपनी काव्यात्मक आभा से इसे और प्रकाशित किया। इनमें से 17 कवि अभी साहिब-ए-किताब नहीं हैं और शेष 4 भी हाल-हाल में ही साहिब-ए-किताब हुए हैं या कुछ वर्ष पहले। इनमें से एक बड़ा प्रतिशत उन कवियों का है, जिन्होंने अपनी कविताओं के प्रकाशन के लिए प्रिंट प्रकाशन माध्यमों को नहीं चुना है। इनमें से भी एक बड़ा प्रतिशत उन कवियों का है, जिन्होंने अपनी कविताओं और अपने पाठक के बीच से संपादक नाम की सत्ता-संस्था-मध्यस्थता को बिल्कुल हटा दिया है। ‘फ़ेसबुक’ इसमें इनका एकमात्र मददगार रहा है, जहाँ से फिर इनके और इनकी कविता के लिए कई तरह की राहें फूटी हैं। इनकी कविता के केंद्रीय की-वर्ड प्रेम, संबंध और अवसाद हैं। इन की-वर्ड्स को एक नए भाषिक वैभव, संवेदना और नवाचार के साथ इन कवियों ने संभव किया है और इनमें—लोक, घर, गाँव, शहर, विस्थापन, महामारी, अन्याय, हिंसा, उम्मीद, संघर्ष, जीवन, मृत्यु, चीज़ें, स्वप्न, कामना, सृजन, समय, निंदा, करुणा, स्त्री, देह, भविष्य, आत्महत्या, मौसम, स्वप्न, ईश्वर, प्रकृति, नदी, भूख, नींद, यात्रा, रहस्य, एकांत, ऊब, आज़ादी, स्मृति, राजनीति, लौटना, भाषा, इतिहास—सरीखे कई की-वर्ड जोड़े हैं।

इसक-2021 की तरह ही इसक-2022 के संदर्भ में भी हमारी कोशिश है कि नव वर्ष के आरंभिक 21 दिनों में हम इन 21 कवियों को और जान सकें। इस प्रसंग में इन कवियों से बातचीत, उनका गद्य, उनके उद्धरण, वीडियो, कार्ड्स… हम अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर जारी करेंगे। इस क्रम में हम गत वर्ष का अपना संकल्प भी दुहराते हैं कि हमारा यह भी यत्न है कि हिंदी की आलोचना और समीक्षा-पद्धति भी कुछ बदले और इन कवियों पर विस्तार से बात हो सके। इस प्रकार संभवतः बग़ैर आलोचना के ही हिंदी में महत्त्वपूर्ण कवि मान लिए जाने का प्रचलन समाप्त हो।

बहरहाल, वर्ष 2022 के लिए हिन्दवी की इसक-सूची यह है :

अखिलेश सिंह
अनुराग अनंत
अमिताभ चौधरी
उपांशु
कमल जीत चौधरी
कुशाग्र अद्वैत
घनश्याम कुमार देवांश
धर्मेश
नवीन रांगियाल
नाज़िश अंसारी
पराग पावन
प्रदीप्त प्रीत
मिथिलेश कुमार राय
राही डूमरचीर
वियोगिनी ठाकुर
शैलेंद्र साहू
संदीप रावत
सारुल बागला
सुघोष मिश्र
सोमेश शुक्ल
सौरभ अनंत

प्रस्तुत सूची हिन्दवी ने हिंदी साहित्य संसार में सक्रिय महत्त्वपूर्ण रचनाकारों, आलोचकों और संपादकों से परामर्श के पश्चात पूर्ण की है।

इस सदी की हिंदी कविता को व्यापक स्थान और प्रसार मिले, हिन्दवी की यह आकांक्षा अपने आरंभ से ही रही है। इस सिलसिले में स्त्री-कवियों पर एकाग्र एक आयोजन नई सृष्टि नई स्त्री शीर्षक से हमने महिला दिवस के अवसर पर मार्च-2021 में संभव किया, उसकी दूसरी कड़ी भी मार्च-2022 में प्रस्तुत करना हमारी योजनाओं में है। इस प्रक्रिया में नामों के दुहराव से हम भरपूर बच रहे हैं, इसलिए यहाँ प्रस्तुत सूची में स्त्री-कवियों की संख्या कम है। इस अर्थ में देखें तो इक्कीसवीं सदी की हिंदी कविता का पूरा दृश्य समझने के लिए हमारा आग्रह है कि कविता-प्रेमी पाठक हमारे दोनों वार्षिक आयोजनों—इसक और नई सृष्टि नई स्त्री—से गुज़रें।

~•~

इसक समग्र के लिए यहाँ देखें : इसक-2022इसक-2021

ट्विटर फ़ीड

फ़ेसबुक फ़ीड