दयाशंकर शुक्ल सागर

सुपरिचित, सक्रिय और सम्मानित पत्रकार-लेखक। ‘महात्मा गांधी : ब्रह्मचर्य के प्रयोग’ शीर्षक से एक पुस्तक प्रकाशित और चर्चित। 'दास्तान-ए-हिन्दवी' स्तंभ के अंतर्गत 'हिन्दवी' के लिए 'हिन्दवी' की दास्तान कहेंगे।

अपभ्रंश का दौर

हिंदी को हमेशा हिंदुस्तानियों से जोड़कर देखा गया है, जिसे बोलने वाले मुसलमान भी थे, हिंदू भी और पारसी भी। इस तरह देखें तो हिंदी का किसी दीन या मज़हब से कुछ लेना-देना नहीं था।

आया कहाँ से ये लफ़्ज…

यह एक बहुत बड़ा भ्रम है कि हिंदी संस्कृत से निकली और उर्दू का जन्म फ़ारसी भाषा से हुआ। सच तो यह है कि ये दोनों ही ज़बानें बोलचाल की मक़ामी ज़ुबान से निकलीं और विकसित होती चली गईं। हिंदी वहाँ से शुरू हुई जहाँ से संस्कृत ख़त्म होती है।

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