सफ़र में होना क्या होता है?

उस दिन पहाड़ पर बादल तेज़ हवाओं के साथ बह रहे थे। वह बादलों की ओर देखकर शायद कोई प्रार्थना कर रही थी। मैंने कहा, “…सब आसमान की तरफ़ देखकर प्रार्थनाएँ क्यूँ करते हैं?” वह मुस्कुराते हुए बोली, “ताकि प्रार्थनाएँ उड़ सकें।” मैंने पूछा, “वे उड़कर कहाँ जाएँगी?” वह बोली, “अपने सफ़र पर।”