कविता सीढ़ियों नहीं, छलाँगों की राह है

कविता अगर यह व्रत ले ले कि वह केवल शुद्ध होकर जिएगी, तो उस व्रत का प्रभाव कविता के अर्थ पर भी पड़ेगा, कवि की सामाजिक स्थिति पर भी पड़ेगा, साहित्य के प्रयोजन पर भी पड़ेगा।

हिंदी साहित्य कहाँ से शुरू करें?

‘हिंदी साहित्य कहाँ से शुरू करें?’ यह प्रश्न कोई भी कर सकता है, बशर्ते वह हिंदी भाषा और उसके साहित्य में दिलचस्पी रखता हो; लेकिन प्राय: यह प्रश्न किशोरों और नवयुवकों की तरफ़ से ही आता है। यहाँ इस प्रश्न का उत्तर कुछ क़दर देने की कोशिश की गई है कि जब भी कोई पूछे : ‘हिंदी साहित्य कहाँ से शुरू करें?’ आप कह सकें : ‘हिंदी साहित्य यहाँ से शुरू करें’ :

क्या एक गल्प है यह

थिएटर देखते समय अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो सबका ध्यान थिएटर में चल रहे दृश्य से हटकर मृत व्यक्ति की ओर आ जाएगा, संभवतः थिएटर थोड़ी देर के लिए रुक या निरस्त भी हो जाए।

उन्हें अपनी प्राथमिकता मत बनाओ जो तुम्हें महज़ विकल्प की तरह रखते हैं

लोग भूल जाएँगे कि तुमने क्या कहा था, लोग भूल जाएँगे कि तुमने क्या किया था, लेकिन लोग कभी नहीं भूलेंगे कि तुमने उन्हें कैसा महसूस कराया था।

‘जो मनुष्य से परे है, वह भी मनुष्य में शामिल है’

अरुण कमल से अंचित की बातचीत

बिना सब कुछ के समाहार के, समावेश के, आप जीवन के एक कण को भी नहीं समझ सकते, सब कुछ मिलकर जीवन बनता है। यहाँ तक कि जो सजीव नहीं है, जैसे वज्र और इसके लिए योग के आसनों के जिन नामों का उपयोग किया गया है, वज्रासन, वह तो निर्जीव है; लेकिन कुछ भी निर्जीव नहीं है।

स्मृतियों का प्रतिफल आँसू है

लेखक को यह नहीं भूलना चाहिए कि कुछ प्रश्न सार्वभौमिक होते हैं, कुछ निजी और कुछ राष्ट्रीय। वह किसी भी प्रश्न से कतरा नहीं सकता। जब तक प्रश्न है, तभी तक साहित्य है।

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