जनवरी एक धुँध भरा सपना है

मुझे अक्सर सुबह-सुबह यह सपना आता है कि हम भाग रहे हैं। मैं भागते हुए बार-बार तुम्हारे चेहरे की तरफ़ देखता हूँ और सपना अचानक यहीं-कहीं तुम्हारी आँखों के पास आकर टूट जाता है। मैं आँखें खोल लेता हूँ। मेरे कानों में फिर भी हम दोनों की मुस्कुराहटों की आवाज़ें गूँजती हैं। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ, वे आवाज़ें ध्यान से सुनता रहता हूँ।

इसक की तीसरी सूची

वर्ष 2021 और 2022 में हमने ‘हिन्दवी’ पर ‘इसक’ के अंतर्गत ऐसे 21 कवियों की कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिन्होंने गए इक्कीस वर्षों में हिंदी-कविता-संसार में अपनी अस्मिता और उपस्थिति को पाया और पुख़्ता किया। ‘इसक’—यानी इक्कीसवीं सदी की कविता का संक्षिप्त रूप—की परिकल्पना को प्रकट और स्पष्ट करते हुए हम कहते आए हैं कि इसक हमारी मुख्य योजनाओं में सम्मिलित है और यह हमारा वार्षिक आयोजन है। इस प्रसंग में ही अब प्रस्तुत है—इसक-2023

नकार को दिसंबर की काव्यात्मक आवाज़

दुनिया वही नहीं रह जाती पहले जैसी, जब उसमें एक अच्छी कविता जुड़ जाती है। सविता सिंह और पंकज सिंह के बारे में यह बात विश्वास से कही जा सकती है जो कभी सोनिया सैंचेज़ ने कही थी कि सारे कवि, कवयित्री और लेखक राजनीतिक होते हैं। या तो वे यथास्थिति को बनाए और बचाए रखना चाहते हैं या फिर वे यह सोचते हैं कि कहीं किसी रूप में कुछ तो ग़लत हो रहा है और इसको बेहतर बनाया जाना हमारा कर्त्तव्य है।

मैं विवेक के साथ क्षण को जीता हूँ

प्रियंवद से विष्णु कुमार शर्मा की बातचीत

प्रियंवद (जन्म : 1952) समादृत साहित्यकार हैं। वह कथा और कथेतर तथा संपादन और सांस्कृतिक सक्रियता के मोर्चों पर अपनी मिसाल आप हैं। जीवितों के हिंदी कथा संसार में वह अकेले हैं जिनके पास सर्वाधिक स्मरणीय, उल्लेखनीय और चर्चित कहानियाँ हैं। आज उनका 70वाँ जन्मदिन है। उन्हें मंगलकामनाएँ देते हुए यहाँ प्रस्तुत है उनसे एक नई और विशेष बातचीत :

‘एक विशाल शरणार्थी शिविर में’

…सभी विस्थापितों को होना था स्थापित। स्थापित होकर सभी को करना था प्रेम। सभी को है अपनी रात और एकांत का इंतज़ार। सभी को लेना था इतिहास से प्रतिशोध। सभी को चाहिए था सपनों के लिए एक बिछौना―अतीत पर पछताने के लिए एक चादर और नींद के लिए एक सिरहाना। फिसलने के लिए तेल चाहिए था सभी को। सभी को चाहिए था चुल्लू भर पानी और एक कमरा।

केवल नाम के बूढ़े आदमी द्वारा बनाए गए ‘सत्तावन’ प्रसिद्ध बहाने

जो लोग सफल नहीं होते हैं, उनमें आम तौर पर एक ख़ास विशेषता होती है। उन्हें विफलता के सभी कारणों का पता होता है और वे उपलब्धि की अपनी कमी के स्पष्टीकरण के लिए विश्वस्त ठोस बहाने बनाते हैं। इन बहानों में से कुछ चालाक होते हैं और उनमें से कुछ तथ्यों द्वारा तर्कसंगत भी होते हैं।

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